कहानी में अभी तक आपने सुना कि कई महीनों से ब्योमकेश बक्शी को कोई काम नहीं मिलता और वो अजित बाबू के साथ घर में हताश बैठा होता है. तभी उनके पड़ोसी देबकुमार बाबू का बेटा हाबुल कमरे में दाखिल होता है. हाबुल रोते हुए बताता कि उसकी बहन की अचानक मौत हो गई जबकि वो बिल्कुल ठीक थी. वो ब्योमकेश से आग्रह करता है कि उसके घर चलकर मामले को देखे...अब आगे...
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